पालघर कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने जव्हार और मोखड़ा को इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने का प्लान तैयार किया है। दाभोसा वॉटरफॉल, जिपलाइन, होमस्टे और ट्राइबल कल्चर पर फोकस। मुंबई के पास ट्राइबल टूरिज्म का नया आकर्षण।
जव्हार और मोखड़ा को पर्यटन हब बनाने की तैयारी: पालघर कलेक्टर का जलप्रपात से गांव पाथवे तक विकास प्लानमहाराष्ट्र के पालघर जिले में छिपे हुए खूबसूरत ट्राइबल इलाकों जव्हार और मोखड़ा को अब पर्यटन के जरिए मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू हो गई है। पालघर कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने हाल ही में क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर सस्टेनेबल टूरिज्म पर आधारित व्यापक विकास योजना तैयार की है। यह प्लान न सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा करेगा।
क्यों खास है यह योजना?
पालघर जिला 2014 में ठाणे से अलग हुआ था और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) का हिस्सा होने के बावजूद यहां विकास की कमी साफ नजर आती है। जव्हार और मोखड़ा मुख्य रूप से आदिवासी बहुल तालुके हैं, जहां घने जंगल, खूबसूरत झरने, पहाड़ी रास्ते और समृद्ध आदिवासी संस्कृति मौजूद है। कलेक्टर की इस पहल का मकसद इन्हीं प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदाओं को पर्यटन के माध्यम से आर्थिक विकास में बदलना है।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और आकर्षण
दाभोसा वॉटरफॉल ग्लास स्काईवॉक: दाभोसा झरने पर करीब ₹2 करोड़ की लागत से ग्लास ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है। यह Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल पर बनेगा, जो पर्यटकों को रोमांचक अनुभव देगा।
कसाटवाड़ी जिपलाइन: ₹1.2 करोड़ की दोतरफा जिपलाइन प्रोजेक्ट एक महीने के अंदर शुरू होने वाला है। एडवेंचर टूरिज्म प्रेमियों के लिए शानदार आकर्षण।
गांव होमस्टे और कम्युनिटी टूरिज्म: 'धरती आबा जनजातीय' पहल के तहत गांवों में होमस्टे विकसित किए जाएंगे। धपरपाड़ा में जव्हार कैंपिंग प्रोजेक्ट इसका अच्छा उदाहरण है। इससे पर्यटक स्थानीय संस्कृति, वारली पेंटिंग, आदिवासी परंपराओं और खान-पान का अनुभव ले सकेंगे।
कनेक्टिविटी सुधार: खैरमल गांव तक 4 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचने के बाद कलेक्टर ने गेटपाड़ा-आयरे रूट पर ब्रिज बनाने का निर्देश दिया। बेहतर सड़कें न सिर्फ पर्यटन, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार पहुंच को भी आसान बनाएंगी।
पर्यावरण और स्थानीय विकास पर फोकस
कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने साफ कहा है कि पर्यटन विकास पर्यावरण संरक्षण के साथ होना चाहिए। मोखड़ा में नए महा ई-सेवा केंद्र का उद्घाटन किया गया, जिससे ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। इसके अलावा मानसून से पहले चेक डैम और गेबियन स्ट्रक्चर्स की सफाई व मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है ताकि पानी की सुरक्षा सुनिश्चित हो और कृषि को बढ़ावा मिले।
मुंबई के पास ट्राइबल टूरिज्म का नया गंतव्य
जव्हार को पहले से ही 'वॉटरफॉल्स का शहर' कहा जाता है। यहां के झरने, जंगलों और राजवाड़ा जैसी ऐतिहासिक जगहें पहले से पर्यटकों को आकर्षित करती रही हैं। अब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवेंचर एक्टिविटी और होमस्टे के साथ यह इलाका वीकेंड गेटअवे के रूप में मुंबई और ठाणे के लोगों के लिए आदर्श बन सकता है।
निष्कर्ष
पालघर कलेक्टर की यह दूरदर्शी योजना अगर सफल हुई तो जव्हार-मोखड़ा न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत के लिए सस्टेनेबल ट्राइबल टूरिज्म का मॉडल बन सकता है। जहां एक तरफ प्राकृतिक सौंदर्य संरक्षित रहेगा, वहीं स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिलेगा।अगर आप ट्राइबल टूरिज्म, महाराष्ट्र के हिडन जेम्स या इको-टूरिज्म पसंद करते हैं तो जव्हार-मोखड़ा की इस नई यात्रा को जरूर फॉलो करें।
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