कष्टभंजन हनुमान जी मंदिर सारंगपुर (बोटाद, गुजरात) का पूरा गाइड – गोपालानंद स्वामी द्वारा स्थापित जीवंत मूर्ति का इतिहास, दर्शन समय, चमत्कारिक महत्व, 54 फीट की प्रतिमा, कैसे पहुंचें और भक्तों के अनुभव। RangarangIndia पर पढ़ें।
कष्टभंजन हनुमान जी मंदिर सारंगपुर बोटाद: कष्टों का नाश करने वाले बजरंगबली का दिव्य धाम
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में बोटाद जिले के बारवाला तालुका के सारंगपुर (सालंगपुर) गांव में स्थित श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर पूरे भारत के हनुमान भक्तों का एक प्रमुख श्रद्धा केंद्र है। “कष्टभंजन” का अर्थ है – कष्टों को भंजन करने वाले, यानी दुखों, भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करने वाले। यह मंदिर स्वामिनारायण संप्रदाय की वडताल गादी से जुड़ा है, लेकिन इसमें मुख्य देवता स्वयं हनुमान जी हैं, जो इसे अन्य स्वामिनारायण मंदिरों से अलग बनाता है।
मंदिर का इतिहास और दिव्य स्थापना
मंदिर की स्थापना 19वीं शताब्दी में हुई। विक्रम संवत 1905 (ईस्वी 1848) के आसपास सादगुरु गोपालानंद स्वामी ने यहां हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की। किंवदंती के अनुसार, जब गोपालानंद स्वामी ने अपनी दिव्य छड़ी (संस्था दंड/छड़ी) से मूर्ति को स्पर्श किया, तो मूर्ति में हलचल हुई और वह जीवंत हो उठी। इसी चमत्कार के कारण यह मंदिर “जागृत” माना जाता है।
मूर्ति की विशेषताएं अनोखी हैं – हनुमान जी मजबूत काया वाले, मूंछों वाले रूप में हैं, दांत दिखाए हुए, और उनके पैर के नीचे शनि देव का स्त्री रूप (या राक्षसी रूप) है। आसपास फल-फूलों और वानर सेवकों की नक्काशी भी है। 1899 में वडताल के कोठारी द्वारा शास्त्री यज्ञपुरुषदास (बाद में BAPS के संस्थापक) को मंदिर का प्रबंधन सौंपा गया था। उन्होंने परिसर का विस्तार और नवीनीकरण किया। बाद में वडताल गादी ने इसे और विकसित किया।
2023 में हनुमान जयंती पर 54 फीट ऊंची पंचधातु की विशाल हनुमान प्रतिमा का अनावरण किया गया, जो लगभग 30,000 किलोग्राम वजन की है और कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है। यह मंदिर परिसर की नई पहचान बन गई है।
कष्टभंजन देव का महत्व और चमत्कार
भक्त मानते हैं कि इस मंदिर में हनुमान जी की दृष्टि मात्र से नकारात्मक शक्तियां, भय और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। विशेष रूप से शनिवार को मानसिक शांति और कष्ट निवारण के लिए “उत्तरा” जैसी पूजा-विधि होती है। भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हैं और दर्शन से शांति अनुभव करते हैं। यहां रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ, आरती और भजन होते हैं। शनिवार और मंगलवार को विशेष भीड़ रहती है।
मंदिर में मुफ्त प्रसाद (भोजनालय) उपलब्ध रहता है। यात्री निवास और धर्मशाला भी हैं।
दर्शन समय (सामान्य)
- सुबह दर्शन: लगभग 6:00 बजे से 12:00 बजे तक
- दोपहर बंद: 12:00 से 4:00 बजे तक (सफाई आदि)
- शाम दर्शन: 4:00 बजे से 8:30/9:00 बजे तक
मंगला आरती सुबह और संध्या आरती शाम को होती है। समय में बदलाव हो सकता है, इसलिए आधिकारिक सूचना या मंदिर वेबसाइट (salangpurhanumanji.org) जांच लें। शनिवार को भारी भीड़ होती है, इसलिए जल्दी पहुंचें।
कैसे पहुंचें सारंगपुर हनुमान मंदिर
- सड़क मार्ग: अहमदाबाद से लगभग 150-160 किमी, भावनगर से करीब 80-85 किमी। राज्य मार्ग अच्छी स्थिति में हैं।
- रेल: निकटतम स्टेशन बोटाद जंक्शन (लगभग 12 किमी)। वहां से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाती है।
- हवाई: निकटतम एयरपोर्ट अहमदाबाद या भावनगर।
- बस: GSRTC और निजी बसें बोटाद/सारंगपुर तक उपलब्ध।
पार्किंग, पानी, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएं मौजूद हैं।
यात्रा के लिए सुझाव
- साधारण और शालीन वस्त्र पहनें।
- मुख्य गर्भगृह में फोटोग्राफी प्रतिबंधित हो सकती है।
- शनिवार या त्योहारों (हनुमान जयंती, काली चौदस आदि) पर जल्दी पहुंचें।
- सर्दियों (अक्टूबर से फरवरी) का मौसम सबसे सुखद रहता है।
- आधिकारिक वेबसाइट या मंदिर कार्यालय से यात्री निवास बुकिंग और अन्य जानकारी लें।
कष्टभंजन हनुमान जी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और शांति का स्रोत है। लाखों भक्त यहां आकर कष्टों से मुक्ति का अनुभव करते हैं। अगर आप गुजरात यात्रा पर हैं या हनुमान जी की कृपा चाहते हैं, तो सारंगपुर जरूर जाएं।
जय श्री राम! जय बजरंगबली! जय कष्टभंजन देव!



















































































































